राहुल गांधी SIR याचिका में ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर 10 बड़ी मांगें की गई हैं। जानिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका की पूरी जानकारी।
राहुल गांधी SIR याचिका में ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर 10 बड़ी मांगें की गई हैं। जानिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका की पूरी जानकारी।

राहुल गांधी SIR याचिका: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 10 बड़ी मांगें

नई दिल्ली: राहुल गांधी SIR याचिका को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से संबंधित फैसलों की वैधानिकता की जांच, मतदाता सूची से हटाए गए नामों का विवरण सार्वजनिक करने, स्वतंत्र ऑडिट कराने और SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने सहित 10 प्रमुख मांगें की गई हैं।

राहुल गांधी SIR याचिका में क्या हैं 10 बड़ी मांगें?

राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिका में चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने, SIR प्रक्रिया की कानूनी वैधता की जांच कराने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की गई है। आइए जानते हैं याचिका में शामिल 10 प्रमुख मांगें।

1. चुनाव आयोग से SIR के सभी रिकॉर्ड मांगे गए

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि चुनाव आयोग SIR से संबंधित सभी महत्वपूर्ण फाइलें, बैठकों के रिकॉर्ड, अधिकारियों की टिप्पणियां और दर्ज आपत्तियां अदालत के सामने प्रस्तुत करे।

इसमें ECINET और ERONET डिजिटल सिस्टम के एक्सेस लॉग तथा 24 जून 2025 को SIR शुरू करने के फैसले से संबंधित रिकॉर्ड भी शामिल हैं।

2. ज्ञानेश कुमार से जुड़े फैसलों की वैधानिकता की जांच हो

याचिका में सवाल उठाया गया है कि SIR से संबंधित विवादित फैसले संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 के अनुरूप लिए गए या नहीं।

याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि यदि कोई फैसला कानूनी अधिकार के बिना लिया गया पाया जाता है, तो उसे रद्द करने पर विचार किया जाए।

3. नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो

याचिका में कहा गया है कि यदि मतदाता सूची तैयार करने या उसमें संशोधन करने के दौरान संवैधानिक अथवा कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

इसमें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई की मांग भी शामिल है।

हालांकि, किसी अधिकारी द्वारा कानून का उल्लंघन किए जाने का अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

4. चुनाव आयोग के फैसले निर्धारित प्रक्रिया से लिए जाएं

याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि SIR से संबंधित फैसले चुनाव आयोग की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिए जाएं।

साथ ही, फैसलों का उचित रिकॉर्ड रखने और आयोग की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

5. ऑनलाइन Form-6 निर्धारित नियमों के अनुसार हो

मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 को लेकर भी याचिका में मांग की गई है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऑनलाइन Form-6 मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में निर्धारित प्रारूप के अनुरूप होना चाहिए। निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना ऐसा बदलाव नहीं किया जाना चाहिए, जो लागू नियमों से अलग हो।

6. स्वतंत्र समिति से SIR का ऑडिट कराया जाए

याचिका की प्रमुख मांगों में स्वतंत्र समिति का गठन भी शामिल है।

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने का अनुरोध किया है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने की मांग की गई है।

प्रस्तावित समिति से निम्न विषयों की जांच कराने की मांग है:

  • SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों का ऑडिट।
  • मतदाता सूची में किए गए संशोधनों की जांच।
  • ECINET और ERONET डेटाबेस तक पहुंच तथा उनमें हुए बदलावों की समीक्षा।
  • EVM से जुड़ी तकनीकी संरचना, नीतियों और प्रक्रियाओं की समीक्षा।
  • निष्पक्ष चुनाव के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाने वाली अच्छी प्रक्रियाओं का अध्ययन।

7. मतदाता सूची से हटाए गए नामों का विवरण सार्वजनिक हो

याचिका में मांग की गई है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए सभी नामों का बूथवार विवरण सार्वजनिक किया जाए।

इसके साथ नाम हटाने का कारण और उम्र तथा लिंग के आधार पर संबंधित विवरण उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी अनुरोध किया है कि जो मतदाता पात्र पाए जाएं, उनके नाम दोबारा शामिल कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

8. नोटिस और सुनवाई के बिना मतदाता का नाम न हटाया जाए

याचिका में मांग की गई है कि किसी भी मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले कानून के अनुसार नोटिस दिया जाए और उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले।

इसके अतिरिक्त, पंजाब और अन्य चुनाव वाले राज्यों में पात्र नागरिकों को कानून के तहत निर्धारित अंतिम तारीख तक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का अवसर देने की मांग भी की गई है।

9. पूरे देश में SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगे

राहुल गांधी और अन्य याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मामले में उठाए गए मुद्दों पर विचार और फैसला होने तक देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया को अंतरिम रूप से स्थगित किया जाए।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इससे पात्र मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की रक्षा की जा सकेगी।

महत्वपूर्ण बात: SIR पर रोक लगाने की मांग और सुप्रीम कोर्ट द्वारा वास्तव में रोक लगाया जाना दो अलग-अलग बातें हैं। केवल याचिका दाखिल होने से प्रक्रिया पर रोक नहीं लग जाती।

10. चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता के लिए अन्य आदेश दिए जाएं

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ऐसे अन्य उचित आदेश जारी करे, जो चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक हों।

राहुल गांधी SIR याचिका में ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए गए?

याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और चुनाव आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि SIR से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण फैसले आयोग के अन्य सदस्यों की जानकारी, मंजूरी या सहमति के बिना लिए गए हो सकते हैं। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित रिकॉर्ड अदालत में पेश कराने और फैसलों की वैधानिकता की जांच करने की मांग की है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये याचिकाकर्ताओं के आरोप हैं। इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित रिकॉर्ड और न्यायिक कार्यवाही के आधार पर ही इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण होगा।

क्या राहुल गांधी SIR याचिका के बाद SIR पर रोक लग गई है?

यह इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। याचिका में SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है, लेकिन मांग किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने रोक का आदेश दे दिया है।

अदालत द्वारा पारित किसी अंतरिम आदेश या अंतिम फैसले की पुष्टि के लिए सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड देखना आवश्यक है। इसलिए अदालत के आदेश की पुष्टि किए बिना यह दावा करना सही नहीं होगा कि SIR प्रक्रिया पर रोक लग गई है।

राहुल गांधी की याचिका पर आगे क्या होगा?

अब मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। सुप्रीम कोर्ट याचिका में उठाए गए कानूनी सवालों, संबंधित दस्तावेजों और पक्षकारों की दलीलों पर विचार कर सकता है।

आगे की सुनवाई में अदालत क्या निर्देश देती है, यह उसके आदेश पर निर्भर करेगा। फिलहाल याचिका में की गई मांगों को अदालत का अंतिम निर्णय नहीं समझना चाहिए।

निष्कर्ष

राहुल गांधी SIR याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और SIR की वैधानिकता से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के रिकॉर्ड पेश कराने, स्वतंत्र ऑडिट कराने, मतदाता सूची से हटाए गए नामों का विवरण सार्वजनिक करने और SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने जैसी 10 प्रमुख मांगें रखी हैं।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी। अदालत का निर्णय ही स्पष्ट करेगा कि याचिका में उठाए गए सवालों पर क्या निर्देश दिए जाते हैं।

तथ्य-जांच के स्रोत

Bar & Bench — याचिका के कानूनी पहलू

3. सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया — आधिकारिक वेबसाइट

Supreme Court of India की आधिकारिक वेबसाइट

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